आज उस तपती दोपहर में, जब सूरज आग उगल रहा था और बिजली ने भी साथ छोड़ दिया था, राहुल और प्रिया की नज़रें कुछ ऐसा कह रही थीं जो सालों से अनकहा था। घर की हर दीवार पसीने से भीगी थी, और उनके अंदर भी कुछ ऐसा ही उमड़ रहा था – एक तपिश, एक प्यास जो बढ़ती जा रही थी। प्रिया, पसीने से तरबतर, सिर्फ एक पतली सूती साड़ी में रसोई से पानी लेकर निकली थी। उसकी साड़ी उसके भीगे बदन से चिपकी हुई थी, हर उभार को उजागर करती हुई। राहुल, सोफे पर अंगड़ाई लेते हुए लेटा था, उसकी आँखें प्रिया के गीले बदन पर ठहर गईं।
“अरे, कितनी गरमी है! कूलर भी बंद,” प्रिया ने माथे का पसीना पोंछते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी सिहरन थी।
राहुल उठा, और धीरे से प्रिया के करीब आया। “हाँ, गरमी तो है,” उसने धीमे स्वर में कहा, उसकी उंगलियाँ अनायास ही प्रिया की गीली बांह को छू गईं। उस स्पर्श में सालों की दबी हुई चाहत थी, एक आग थी जो अब दहकने लगी थी। प्रिया का बदन उस हल्के से छूने पर काँप गया। उसने अपनी आँखें उठाईं और राहुल की आँखों में देखा। उन आँखों में सिर्फ प्यार नहीं था, कुछ और भी था—एक गहरी, अनकही वासना।
वह पल जैसे थम गया। दोनों को पता था कि यह क्या है, यह कौन-सी आग थी जो उन्हें बरसों से अंदर ही अंदर जला रही थी। एक **भाई बहन** के रिश्ते की मर्यादाओं को लाँघने की चाहत, एक वर्जित फल को चखने की ललक।
राहुल ने धीरे से अपना हाथ प्रिया की कमर पर रखा, उसे अपनी ओर खींचते हुए। प्रिया ने विरोध नहीं किया, बल्कि और करीब सरक आई। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और उसकी धड़कन राहुल की धड़कन से मिल रही थी। राहुल ने धीरे से उसकी साड़ी का पल्लू सरका दिया, और प्रिया के नंगे पेट पर अपनी हथेली रख दी। उसकी उंगलियाँ हल्के से उसके नाभि के इर्द-गिर्द घूमने लगीं, जिससे प्रिया की आँखें बंद हो गईं और उसके मुँह से एक धीमी आह निकली।
“राहुल…” प्रिया ने फुसफुसाया, जैसे उसे खुद पर यकीन न हो।
“चुप रहो,” राहुल ने उसके होंठों पर अपनी उंगली रखते हुए कहा। फिर उसने धीरे से झुककर उसके गुलाबी होंठों को चूम लिया। वह चुंबन गहरा था, प्यासा था, और उसमें बरसों का इंतजार घुला हुआ था। प्रिया ने भी पूरी शिद्दत से उसका साथ दिया, अपने हाथों को राहुल की गर्दन के पीछे कसते हुए। उनकी जीभें एक-दूसरे से मिल गईं, जैसे दो प्रेमी सदियों बाद मिल रहे हों।
राहुल ने प्रिया को गोद में उठा लिया और बेडरूम की ओर बढ़ चला। कमरे में भी तपिश थी, पर उनकी साँसों की गरमी उस तपिश पर भारी पड़ रही थी। उसने प्रिया को धीरे से बिस्तर पर लिटाया, और फिर उसके ऊपर झुक गया। उसके हाथ प्रिया के बदन पर हर जगह घूमने लगे – उसकी कमर, उसकी जाँघें, उसके भरे हुए वक्ष। प्रिया ने अपनी साड़ी पूरी तरह खोल दी, और अब सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। राहुल ने धीरे से उसके ब्लाउज के बटन खोले, और उसके उरोजों को आज़ाद कर दिया।
“आज तक मैंने तुम्हें ऐसे नहीं देखा,” राहुल ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, उसकी आवाज़ वासना से भरी हुई थी।
प्रिया शर्माई नहीं, बल्कि उसकी आँखों में भी वही नशा था। “और मैंने भी तुम्हें,” उसने फुसफुसाया।
राहुल ने उसके उरोजों को अपने हाथों में लिया और फिर उन्हें अपने मुँह में भर लिया, जैसे कोई भूखा बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो। प्रिया के मुँह से दर्द और आनंद से भरी चीख निकली। उसकी उंगलियाँ राहुल के बालों में उलझ गईं, और वह उसे और कसकर अपने ऊपर खींचने लगी। राहुल नीचे उतरता गया, उसके पेट, उसकी नाभि, और फिर उसके पेटीकोट के अंदर। प्रिया की जाँघें बेताबी से खुलने लगीं। उसने अपने पेटीकोट को भी हटा दिया, और अब दोनों के बदन एक-दूसरे के सामने पूरी तरह नंगे थे।
उनके बदन एक-दूसरे को छूने लगे – गर्म त्वचा, पसीना, और वह तीव्र गंध जो सिर्फ वासना की होती है। राहुल ने अपनी उंगली प्रिया की गीली योनि पर फिराई। प्रिया की आँखें आनंद से बंद हो गईं, और उसका बदन थरथराने लगा। वह अब और इंतजार नहीं कर सकती थी।
“राहुल… अब और नहीं…” उसने काँपते हुए कहा।
राहुल ने धीरे से अपनी पैंट उतारी, और फिर प्रिया के ऊपर आ गया। उनके बदन एक-दूसरे में समाने के लिए तैयार थे। वह पल, **भाई बहन** के इस अनकहे रिश्ते का चरम था। राहुल ने धीरे से खुद को प्रिया के अंदर धकेला।
एक गहरी आह, और फिर दोनों एक-दूसरे में समा गए। कमरे में सिर्फ उनकी साँसों की आवाज़ें थीं, उनके बदन की रगड़ थी, और वह आग थी जो अब पूरी तरह से जल चुकी थी। वे दोनों उस पल में पूरी दुनिया भूल चुके थे, सिर्फ एक-दूसरे में खोए हुए। यह उनका गुप्त संसार था, जहाँ रिश्ते की कोई सीमा नहीं थी, सिर्फ दो प्यासे बदन थे, जो एक-दूसरे की प्यास बुझा रहे थे।
जब सब कुछ शांत हुआ, तो दोनों पसीने से लथपथ एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। बाहर गरमी अब भी वैसी ही थी, पर उनके अंदर एक अजीब-सी शांति थी, एक संतुष्टि थी। उन्होंने एक-दूसरे की आँखों में देखा, और उस नज़र में एक गहरा प्यार था, एक अपराध-बोध था, और एक अनकहा वादा था कि यह उनका राज़ हमेशा उनका ही रहेगा। उनकी दुनिया अब बदल चुकी थी, एक ऐसे गहरे, वर्जित रिश्ते से, जो उन्हें हमेशा के लिए बांध चुका था।
Leave a Reply