रीना की आँखों में आज नींद नहीं थी। सावन की तपिश और मन की आग, दोनों ही उसे बेचैन कर रही थीं। छत पर अकेली, साड़ी का पल्लू कमर पर कसकर बाँधे, वह ठंडी हवा का इंतज़ार कर रही थी। पर हवा कहाँ थी? सिर्फ उसके बदन में सुलगती आग थी, जिसे कोई बुझाने वाला नहीं था। उसकी आँखें पास की छत पर टिकी थीं, जहाँ अर्जुन का साया अक्सर दिखता था, उसकी हरकतों में एक अजीब सा निमंत्रण छुपा होता था।
आज रात भी वो साया दिखा। एक लम्बा, मजबूत कद, अँधेरे में भी जिसकी आभा रीना को अपनी ओर खींच रही थी। अर्जुन ने धीरे से अपनी छत की मुंडेर पार की और बिना किसी आहट के रीना के पास आ खड़ा हुआ। रीना का दिल धक्-धक् करने लगा। उसकी नज़रें अर्जुन की आँखों से मिलीं, जहाँ एक गहरी, अनकही प्यास साफ दिख रही थी।
“रीना,” अर्जुन की फुसफुसाहट अंधेरे में एक बिजली सी दौड़ गई। वह उसके पास आया, बिना कुछ कहे, बस उसकी आँखों में देख रहा था। रीना का दिल जोर से धड़कने लगा। उसने अर्जुन का हाथ अपने हाथों में ले लिया, उसकी उँगलियों की गर्मी उसके भीतर तक उतर गई।
“डर नहीं लगता?” रीना ने धीमे से पूछा, उसकी आवाज़ काँप रही थी।
“जब आग लगी हो, तो डर कहाँ?” अर्जुन ने उसे अपनी ओर खींच लिया। उसकी मजबूत बाहों ने रीना के बदन को जकड़ लिया। साड़ी का पल्लू ढीला होकर ज़मीन पर सरक चुका था, रीना के खुले हुए कमर पर अर्जुन की गर्म हथेली महसूस हो रही थी।
अर्जुन के होंठ रीना के गले पर उतरे, फिर धीरे-धीरे उसके काँधे पर, उसकी धड़कती नसों को चूमते हुए। रीना की आँखें बंद होने लगीं, उसके बदन में एक सिहरन दौड़ गई।
“शशश… धीरे,” अर्जुन ने उसके कान में फुसफुसाया, “मुझे लगता है… **कोई देख रहा है**।”
इस एक वाक्य ने डर की बजाय रीना के भीतर एक अजीब सा रोमांच जगा दिया। पकड़े जाने का डर और भी तेज़ वासना में बदल गया। उसने अपने हाथों से अर्जुन के बालों को जकड़ लिया और उसे और करीब खींच लिया, अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।
अर्जुन के हाथों ने रीना की कमर पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली, उसे अपनी ओर दबाते हुए। रीना की पीठ पर उसके गर्म सांसों की आहटें और उसके कठोर सीने का स्पर्श… उसे किसी और दुनिया में ले जा रहा था। अर्जुन ने धीरे से उसके कंधे से ब्लाउज का हुक खोला, और वह कपड़ा ज़मीन पर सरक गया। रीना के भरे हुए स्तन अब अर्जुन की आँखों के सामने थे, चाँदनी में चमकते हुए। अर्जुन की नज़रें उन पर ठहरीं, और फिर उसके होंठ उन पर टूट पड़े, पहले एक कोमल चुंबन, फिर एक जंगली, मदहोश कर देने वाला चूसना। रीना की दर्द भरी आहें रात के सन्नाटे में घुलने लगीं।
रीना ने अर्जुन की शर्ट को खींचकर फाड़ दिया, उसके मजबूत बदन पर अपने नाखूनों से निशान छोड़ती हुई। दोनों के जिस्म एक-दूसरे से चिपक गए थे, पसीने और वासना की गंध हवा में घुलने लगी थी। अर्जुन ने रीना को उठाकर दीवार से टिका दिया, और उसके पैरों को अपनी कमर के चारों ओर लपेट लिया। उसकी गर्म उँगलियाँ रीना की साड़ी के भीतर घुस गईं, और पल भर में उसके अंदरूनी वस्त्रों को भी हटा दिया। रीना की योनि अब नम और उत्तेजित थी, अर्जुन के स्पर्श के लिए बेताब, उसकी गर्माहट से सुलगती हुई।
“तुम मेरी हो,” अर्जुन ने गुर्राते हुए कहा, और उसने अपनी कमर पर दबाव डाला। रीना ने एक तीखी चीख दबाई, जब उसका कठोर लिंग उसके अंदर गहराई तक समा गया। पहली चुभन के बाद, एक गहरी, बेकाबू संतुष्टि की लहर उसके पूरे जिस्म में दौड़ गई। दोनों ने एक-दूसरे को कसकर पकड़ लिया, उनकी साँसें एक हो गईं, उनकी हरकतें एक लय में ढल गईं। छत पर सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ और रीना की मदहोश कर देने वाली सिसकियाँ गूंज रही थीं।
जैसे-जैसे उनके बदन की आग बढ़ती गई, रीना की आँखें अचानक खुलीं। उसे लगा, किसी परछाई ने दूसरी छत पर सरसराहट की है। उसके होंठों पर एक शरारती मुस्कान फैल गई, और उसने अर्जुन के कान में फुसफुसाया, “शायद… **कोई देख रहा है**।” अर्जुन ने उसकी आँखों में देखा, एक पल के लिए उसकी आँखों में भी डर था, पर फिर वह डर एक जंगली उत्तेजना में बदल गया। उसने अपनी गति और बढ़ा दी, हर धक्के के साथ रीना के भीतर तक उतरता हुआ। पकड़े जाने का रोमांच उन्हें और भी उत्तेजित कर रहा था, वासना के इस खेल में हर खतरा एक नया मोड़ दे रहा था।
रीना की कमर अपने आप ऊपर उठने लगी, उसके होंठों से निकलती हर चीख वासना और आनंद का मिश्रण थी। अर्जुन ने भी अपने आपको पूरी तरह से रीना के हवाले कर दिया था। कुछ पल बाद, एक तेज़ झटके के साथ, दोनों के जिस्मों से एक गर्म लहर निकली, और वे एक साथ चरम सीमा पर पहुँच गए। रीना ने अपनी आँखों में आँसू लिए, अर्जुन को कसकर गले लगा लिया। वे दोनों ऐसे ही एक दूसरे से चिपके रहे, उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं, उनकी त्वचा पर चिपका पसीना चाँदनी में चमक रहा था।
चाँदनी अब भी उन पर पड़ रही थी, उनके पसीने से भीगे बदन चमक रहे थे। रीना ने अर्जुन के माथे पर एक गहरा चुंबन दिया। उस क्षण, दुनिया की सारी चिंताएँ, सारे डर, सब कुछ गायब हो चुका था। उन्हें बस एक-दूसरे की बाहों में लिपटे होने का सुकून महसूस हो रहा था। **कोई देख रहा है** या नहीं, अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। उनके लिए वो छत, वो रात और वो पल ही सब कुछ था। एक गहरी संतुष्टि और वर्जित प्रेम का नशा उनकी रगों में दौड़ रहा था।
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