प्रिया की नीली साड़ी पर जब राकेश की आँखों का जादू चला, तो उसे पता ही नहीं चला कि उसकी शादीशुदा ज़िंदगी में एक नया तूफान आने वाला था। आज पति शहर से बाहर थे, और घर की हर खामोशी प्रिया को राकेश की याद दिला रही थी, जो ठीक बगल वाले फ्लैट में रहता था – उसका पड़ोसी।
रात के ठीक आठ बजे थे जब दरवाज़े पर हलकी सी दस्तक हुई। प्रिया ने दिल पर हाथ रख लिया। वही था, राकेश। “प्रिया जी, क्या आपके पास मोमबत्ती होगी? हमारे यहाँ लाइट चली गई है,” उसकी भारी आवाज़ ने प्रिया के अंदर एक अजीब सी सिहरन पैदा कर दी। प्रिया ने दरवाज़ा थोड़ा और खोला। राकेश, अपनी नीली जीन्स और सफ़ेद टी-शर्ट में, आज कहीं ज़्यादा आकर्षक लग रहा था।
“हाँ, राकेश जी, है… मैं अभी लाती हूँ,” प्रिया ने कहा, उसकी आवाज़ में एक हल्की सी घबराहट थी। जब वह मोमबत्ती लेकर लौटी, तो देखा राकेश दरवाज़े पर ही खड़ा मुस्करा रहा था। “आप अंदर आ जाइए, राकेश जी। अँधेरे में कब तक रहेंगे?” प्रिया ने कहा, उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। राकेश ने एक क्षण के लिए उसकी आँखों में देखा और फिर अंदर आ गया। जैसे ही वह अंदर आया, प्रिया ने दरवाज़ा बंद कर लिया।
कमरे में मोमबत्ती की पीली रौशनी में राकेश का चेहरा और भी रहस्यमय लग रहा था। प्रिया ने मोमबत्ती उसे थमाई और तभी राकेश का हाथ अनजाने में प्रिया के हाथ को छू गया। एक बिजली सी दौड़ गई दोनों के बदन में। राकेश ने प्रिया का हाथ हल्के से पकड़े रखा। “प्रिया जी, आप आज अकेली हैं?” उसकी आवाज़ में एक गहरापन था। प्रिया ने सिर्फ़ ‘हाँ’ में सिर हिलाया। राकेश ने धीरे से प्रिया के कंधे पर हाथ रखा और उसे अपनी तरफ़ खींच लिया। प्रिया का बदन काँप गया, उसकी साँसें अटक गईं। उसने राकेश की चौड़ी छाती पर अपना सिर रख दिया।
राकेश ने बिना कुछ कहे, प्रिया की कमर पर अपना हाथ फेरा और उसे अपने और करीब कर लिया। प्रिया की साड़ी का पल्लू कब ज़मीन पर गिर गया, उसे पता ही नहीं चला। राकेश के होंठ प्रिया के नरम होंठों से मिल गए। यह एक ऐसी चुम्बन थी जिसने प्रिया के वर्षों की प्यास जगा दी थी। राकेश के होंठ धीरे-धीरे नीचे उतरते गए, प्रिया की गर्दन, फिर उसके गले को चूमते हुए। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और राकेश के बालों को अपनी उँगलियों से कसकर पकड़ लिया।
राकेश ने प्रिया को अपनी बाहों में उठाया और सीधे बेडरूम की तरफ़ बढ़ गया। प्रिया ने एक आह भरी। बेड पर पहुँचकर राकेश ने प्रिया को धीरे से लिटाया। मोमबत्ती की धुँधली रौशनी में प्रिया का दमकता जिस्म राकेश की आँखों में साफ़ दिख रहा था। राकेश ने बड़ी नज़ाकत से प्रिया की साड़ी खोली और उसे एक किनारे कर दिया। प्रिया सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी, और राकेश की नज़रें उसे पूरी तरह नग्न कर रही थीं। प्रिया ने शरमाकर अपनी आँखें बंद कर लीं, लेकिन उसके शरीर में उठ रही आग अब बेकाबू हो रही थी।
राकेश ने प्रिया की ब्रा को ऊपर खींचा और उसके भरे हुए वक्षों को आज़ाद कर दिया। उसकी उँगलियाँ उसके निप्पलों पर घूमते ही प्रिया के मुँह से एक सिसकी निकल गई। राकेश ने उसके एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और उसे धीरे-धीरे चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो। प्रिया ने अपनी कमर ऊपर उठा ली, उसकी पैंटी अब उसके लिए एक बंधन बन चुकी थी। राकेश ने अपनी पैंटी उतारी और फिर प्रिया की पैंटी भी बड़ी आसानी से उतार दी।
अब दोनों नग्न थे, मोमबत्ती की मंद रौशनी में उनके शरीर एक-दूसरे के लिए तड़प रहे थे। राकेश ने अपना कठोर अंग प्रिया की भीगी हुई योनि के द्वार पर रखा। प्रिया ने अपनी टाँगें चौड़ी कर लीं और राकेश को अपनी कमर से खींच लिया। एक गहरे झटके के साथ, राकेश का पूरा लिंग प्रिया के अंदर समा गया। “आह…!” प्रिया के मुँह से एक तीव्र आवाज़ निकली। उसके पूरे शरीर में एक रोमांच दौड़ गया। राकेश ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। प्रिया भी अपनी कमर ऊपर उठाकर उसका साथ दे रही थी।
उनकी साँसें तेज़ होती गईं, उनके शरीर पसीने से भीगने लगे। कमरे में सिर्फ़ उनकी कामुक आहों और बेड के हिलने की आवाज़ थी। राकेश की गति तेज़ होती गई, और प्रिया हर धक्के के साथ एक नई गहराई में उतर रही थी। “और तेज़, राकेश… और तेज़!” प्रिया फुसफुसाई, उसके होंठ राकेश के कान के पास थे। राकेश ने उसकी बात मानी और अपनी पूरी ताकत से उसे भोगने लगा। प्रिया का शरीर काँप रहा था, उसकी आँखें पीछे घूम चुकी थीं। एक ज़बरदस्त झटका लगा और प्रिया का शरीर कस गया। वह चरमसुख की गहराइयों में डूब चुकी थी। राकेश ने भी कुछ और धक्के लगाए और फिर प्रिया के अंदर ही अपना सारा रस उड़ेल दिया।
दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए। प्रिया ने राकेश के सीने पर अपना सिर रख लिया। यह एक रात थी जिसे वह कभी नहीं भूलेगी, अपने पड़ोसी के साथ बिताई वासना और प्यार से भरी रात। बाहर अभी भी अँधेरा था, लेकिन प्रिया के अंदर अब एक नई रौशनी जगमगा रही थी।
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