उस तपती दोपहर में अंजली का बदन सिर्फ गर्मी से नहीं, बल्कि एक अधूरी चाहत से भी सुलग रहा था। पैंतीस की दहलीज पर खड़ी, उसका शरीर जवान और कामुक था, पर दिल सूना और प्यासा। पति की विदेश यात्रा ने उसे और भी अकेला कर दिया था। उसने अपनी ढीली-ढाली सूती मैक्सी को और ढीला किया, पर भीतर की आग बुझ नहीं रही थी। तभी दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई।
अंजली ने सोचा, कौन होगा इस तपती धूप में? दरवाज़ा खोला तो सामने राहुल खड़ा था, उनके पड़ोसी के बेटे, जो हाल ही में शहर लौटा था। उसकी क़द-काठी, आँखों में शरारत और उसकी बेबाक मुस्कान अंजली को भीतर तक छू गई। “अंजली भाभी, पानी का कनेक्शन नहीं आ रहा था, सोचा आपसे पूछ लूँ?” राहुल ने कहा, उसकी निगाहें अनजाने में अंजली के मैक्सी के खुले गले से झाँकते वक्षों पर ठहर गईं। अंजली ने झिझक कर अपने आँचल को ठीक किया।
“अंदर आओ राहुल, बहुत गर्मी है। पानी आता ही होगा।” अंजली ने उसे ड्राइंग रूम में बिठाया। एयर कंडीशनर बंद था और उमस से माहौल और भी चिपचिपा हो रहा था। राहुल ने अपनी कमीज़ के बटन खोले, उसकी छाती पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं। अंजली की साँसें तेज़ होने लगीं। उनकी आँखों में एक अनकही जुबान चल रही थी। “भाभी, आप भी बहुत परेशान लग रही हैं, इस गर्मी में।” राहुल ने नज़दीक आते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी गर्माहट थी।
अंजली का दिल धड़क रहा था। उसने अपने होंठ भींचे। राहुल ने धीरे से उसका हाथ अपने हाथ में लिया। उसकी उंगलियों का स्पर्श अंजली के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ा गया। “मुझे लगता है… आज मेरी अधूरी प्यास बुझाने **कोई मिल गया** है,” अंजली ने मन ही मन सोचा, उसकी आँखों में एक नई चमक थी। राहुल ने उसकी आँखों में देखा, जैसे उसे अंजली के मन की बात पता चल गई हो। उसने बिना कुछ कहे, अंजली को अपनी बाहों में भर लिया।
यह एक ऐसा आलिंगन था जिसकी अंजली को बरसों से तलाश थी। राहुल के मज़बूत हाथों ने उसे कसकर जकड़ लिया। उसके होंठ अंजली की गर्दन पर फिरे, फिर धीरे-धीरे ऊपर चढ़ते हुए उसके सूखे होंठों से मिल गए। यह एक भूखा, प्यासा चुंबन था, जिसमें सालों की हवस और अनकही चाहत पिघल रही थी। अंजली ने भी उतनी ही शिद्दत से उसका जवाब दिया, उसकी उंगलियाँ राहुल के बालों में उलझ गईं।
चुंबन गहरा होता गया। राहुल ने अंजली को उठा लिया और बेडरूम की तरफ़ चल पड़ा। अंजली ने बिना किसी हिचक के अपनी टांगें उसकी कमर के इर्द-गिर्द कस लीं। बिस्तर पर पहुँचते ही उनके कपड़े एक-एक कर उतरने लगे। मैक्सी ज़मीन पर गिर गई और राहुल की कमीज़ भी। अंजली के भरे हुए स्तन आज़ाद होकर राहुल की हथेलियों में समा गए। उसने उनके निप्पलों को चूमा, काटा, जिससे अंजली के मुँह से दर्द भरी आह निकल गई।
राहुल ने अंजली की पैंटी को नीचे सरकाया, और उसकी उंगलियाँ अंजली की कामुक योनि पर जा टिकीं। अंजली का शरीर पहले से ही गीला था। उसकी उंगलियाँ भीतर-बाहर होने लगीं, अंजली बिस्तर पर मचलने लगी। “राहुल… ओह… और तेज़…” उसकी आवाज़ कामुकता से भरी हुई थी। राहुल ने अपने होंठ अंजली की जाँघों के बीच ले जाकर उसकी योनि को चाटना शुरू किया। अंजली का बदन ऐंठ गया, उसके पैर काँपने लगे। वह राहुल के बालों को सहला रही थी, उसके मुँह से सिर्फ़ आहें और सिसकियाँ निकल रही थीं।
जब अंजली को लगा कि वह अब और बर्दाश्त नहीं कर पाएगी, तब राहुल ऊपर आया। उसने अपने मज़बूत, उत्तेजित लिंग को अंजली की योनि के द्वार पर टिकाया। एक गहरी साँस लेकर, उसने धीरे-धीरे भीतर धकेला। अंजली की आँखों से आँसू छलक गए, यह दर्द का नहीं, बल्कि इतने सालों बाद मिलने वाले अनमोल सुख का आँसू था। “आहह्ह… राहुल…”
राहुल ने धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीरे, फिर तेज़, लयबद्ध तरीके से। अंजली भी उसमें पूरी तरह से डूब गई, अपनी कमर को ऊपर उठाकर उसका साथ दे रही थी। उनके जिस्मों से पसीने की बूँदें टपक रही थीं, पर उन्हें इसकी परवाह नहीं थी। उनके शरीर एक-दूसरे में इस कदर समा गए थे कि लग रहा था वे एक ही इंसान बन गए हों। हर धक्के के साथ, अंजली को लग रहा था कि उसकी ज़िंदगी की अधूरी कहानी पूरी हो रही है। उसकी हर साँस में, हर धक्के में, अंजली को अहसास हो रहा था कि उसकी ज़िंदगी में सचमुच **कोई मिल गया** है।
दोनों का चरम सुख एक साथ आया। अंजली ने राहुल को कसकर जकड़ लिया, उसके नाखून उसकी पीठ पर धँस गए। राहुल ने भी अपनी पूरी ताकत से अंजली को अपनी बाँहों में भर लिया, और गहरी साँस लेते हुए उसके भीतर ही ढीला पड़ गया।
वे देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे, पूरी तरह शांत और संतुष्ट। सूरज ढल चुका था और कमरे में एक हल्की सी रोशनी फैल रही थी। अंजली ने राहुल के बालों में हाथ फेरा, उसके चेहरे पर एक गहरी, शांत मुस्कान थी। उसकी वर्षों की प्यास आज बुझ गई थी। उसे पता था कि आज से उसकी रातें कभी अकेली नहीं रहेंगी। उसने राहुल को और कसकर गले लगा लिया।
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