दोपहर की तपती धूप में, पंखा बंद था और मेरी चाची सुनीता, बस एक पतली मैक्सी में मेरे सामने बैठी, मेरी हवस को और बढ़ा रही थी। बिजली कटी हुई थी और उमस भरे माहौल ने कमरे में एक अजीब सी उत्तेजना घोल दी थी। उनकी सांवली त्वचा पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं, और मैक्सी के पतले कपड़े से उनके उभरते हुए वक्ष साफ नजर आ रहे थे, जैसे वे मुझे अपनी ओर खींच रहे हों।
“बहुत गर्मी है रोहन,” चाची सुनीता ने एक लंबी आह भरते हुए कहा, और अपने आँचल से गर्दन पर आया पसीना पोंछा। उनकी उंगलियाँ अनजाने में ही उनके सीने को छू गईं, और मैंने देखा कि उनके गुलाबी निप्पल मैक्सी के कपड़े के नीचे से साफ दिख रहे थे। मेरा लंड पैंट के अंदर ही खड़ा होने लगा था।
मैंने हिम्मत करके कहा, “चाची, मैं आपकी पीठ मल दूं? शायद थोड़ी राहत मिले।”
चाची ने मेरी तरफ देखा, उनकी आँखों में एक क्षणिक झिझक थी, फिर एक रहस्यमयी मुस्कान तैर गई। “ठीक है, आजा।”
मैं उनके पीछे गया। जैसे ही मेरे हाथ उनकी गरम, पसीने से भीगी पीठ पर पड़े, एक सिहरन सी उनके बदन में दौड़ गई। मैंने धीरे-धीरे उनकी गर्दन से नीचे, उनकी कमर की ओर मालिश करना शुरू किया। चाची ने आँखें मूँद लीं, और एक गहरी साँस ली। मेरी उंगलियाँ उनकी मैक्सी के कपड़े के अंदर से उनकी नंगी पीठ को सहला रही थीं, और उनके गर्म बदन की खुशबू मेरे नथुनों में भर रही थी।
“आह… बहुत अच्छा लग रहा है रोहन,” उनकी आवाज़ में एक हल्की कामुकता थी। मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था। मैंने और हिम्मत की, और अपने हाथों को उनकी कमर से थोड़ा नीचे सरकाया, जहाँ मैक्सी थोड़ी ऊपर उठ गई थी। मेरी उंगलियों ने उनकी नितंबों को महसूस किया, जो नरम और मांसल थे। चाची ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि हल्की सी कराह उनके होठों से निकली।
मेरी हिम्मत और बढ़ गई। मैंने उनके कंधों को पकड़कर उन्हें अपनी ओर मोड़ा। उनके चेहरे पर गर्मी और उत्तेजना साफ झलक रही थी। उनकी साँसें तेज हो गई थीं। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, और एक गहरा, भीगा चुम्बन शुरू कर दिया। चाची ने पहले तो हल्का सा झटका दिया, फिर उनके होंठ खुल गए और उन्होंने भी मेरा साथ दिया। उनकी जीभ मेरी जीभ से टकराई और एक अजीब सा नशा छा गया।
मेरे हाथ उनकी मैक्सी के ऊपर से ही उनके बड़े, नरम स्तनों को सहलाने लगे। उनके निप्पल कड़े हो गए थे, और वे मेरी हथेली में मचल रहे थे। चाची ने मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में कस लिया, और उनके होंठों से मदभरी आहें निकलने लगीं। हमें पता था कि हम क्या कर रहे हैं, और कोई वापसी नहीं थी।
हमने एक-दूसरे को धकेलते हुए बेडरूम का रास्ता लिया। जैसे ही हम बिस्तर पर गिरे, मैंने बिना देर किए उनकी मैक्सी ऊपर उठाई और फिर उसे उनके जिस्म से उतार दिया। चाची अब मेरे सामने बिल्कुल नग्न थीं। उनके भरे हुए स्तन, उनके पेट की हल्की सी गोलाई, और नीचे उनकी योनि पर घने बाल… सब कुछ इतना मोहक था कि मैं पागल हुआ जा रहा था। मेरे लंड ने अपनी पैंट फाड़कर बाहर आने की जिद पकड़ ली थी। मैंने जल्दी से अपनी पैंट और अंडरवियर भी उतार दिया।
अब हम दोनों एक-दूसरे के सामने नग्न थे। चाची ने मेरे लंड को देखा, और उनकी आँखों में एक चमक सी आ गई। उन्होंने अपना हाथ मेरे लंड पर रखा, और उसे हल्के से सहलाया। “कितना गरम है ये,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। फिर उन्होंने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगीं। उनकी जीभ की गरमाहट और गीलापन मेरे लंड को पागल कर रहा था। मैं खुशी से चिल्ला उठा।
मैं अब और सब्र नहीं कर सकता था। मैंने चाची को नीचे लिटाया, उनके पैर फैला दिए और उनकी योनि के ऊपर अपने लंड का सिरा रखा। उनकी योनि नम और तैयार थी। मैंने एक गहरा धक्का लगाया और मेरा लंड एक ही झटके में उनकी गरम, भीगी योनि में समा गया। चाची की चीख निकल गई, लेकिन वो खुशी की थी। “आह्ह्हह… रोहन… धीरे… धीरे…”
मेरी कमर ने एक लय पकड़ ली थी। मैं अंदर-बाहर हो रहा था और चाची अपने नितंबों को ऊपर उठाकर मेरा पूरा साथ दे रही थीं। हम दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह से खो चुके थे। हर धक्के के साथ चाची की कामुक आहें निकल रही थीं। उनके स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके होठों से गंदी गालियाँ निकल रही थीं, जो मेरे जोश को और बढ़ा रही थीं। “तेरा लंड कितना मोटा है रे रोहन… और जोर से डाल… मेरी चूत फाड़ दे…”
कमरे में सिर्फ हमारे जिस्मों के टकराने की आवाज़ें और हमारी साँसों की गरमाहट गूँज रही थी। मैं पूरी ताकत से चाची की चुदाई कर रहा था। मेरी चाची की चुदाई… ये शब्द मेरे दिमाग में घूम रहा था, और मुझे और भी जंगली बना रहा था। मैंने उनकी कमर को जोर से पकड़ा और अंतिम धक्के देने लगा। चाची की योनि पूरी तरह से गीली और गर्म थी। “आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…” चाची एक लंबी, मधुर चीख के साथ मेरे नीचे काँप उठीं। उनके बदन में एक सिहरन दौड़ गई और उन्होंने मुझे कसकर अपनी बाहों में भर लिया। कुछ ही पलों बाद, मेरे बदन से भी गरम वीर्य का फव्वारा उनके अंदर निकल गया। मैं उनके ऊपर ढेर हो गया, मेरी साँसें बेकाबू थीं।
हम दोनों पसीने से लथपथ एक-दूसरे से चिपके हुए थे। दोपहर की तपिश अब एक अजीब सी ठंडक और सुकून में बदल चुकी थी। चाची ने मेरे गाल पर एक भीगा चुम्बन दिया। “आज की दोपहर हमेशा याद रहेगी रोहन,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा, उनकी आँखों में एक नई चमक थी। मैं मुस्कुराया, जानता था कि ये सिर्फ शुरुआत थी।
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