राज की आँखें बरसों से जिस आग को अपने अंदर दबाए बैठी थीं, आज रीना की नज़रों में उसे धधकते देख रही थीं। शाम ढल चुकी थी, और आस-पड़ोस में सन्नाटा पसरा हुआ था, ठीक वैसे ही जैसे राज़ के दिल में रीना के लिए दबी इच्छाओं का सन्नाटा। रीना, उस मोहल्ले की सबसे ख़ूबसूरत जवान लड़की, आज राज़ के घर अकेली आई थी, एक बहाना बनाकर, पर दोनों जानते थे कि इरादा कुछ और ही था।
हवा में एक अजीब सी ख़ुश्बू तैर रही थी – फूलों की नहीं, बल्कि दबी हुई वासना की। राज़ ने धीरे से दरवाज़ा बंद किया, उसकी धड़कनें बेतहाशा तेज़ हो रही थीं। अँधेरे में ही, उसने रीना को अपनी बाहों में भर लिया, उसके बदन की गरमाहट राज़ को भीतर तक महसूस हो रही थी। रीना की साँसें तेज़ हो गईं, उसकी पतली कमर राज़ की मज़बूत हथेलियों में पिघलने लगी। उसने अपनी गर्दन पीछे झुकाई और राज़ को अपने अधरों का अनमोल तोहफ़ा दिया। उनके होंठ मिले और एक दूसरे की प्यास बुझाने को बेताब हो उठे।
राज़ ने उसके गले से नीचे उतरते हुए उसकी साँसों को और गहरा किया, उसकी साड़ी का आँचल कब ज़मीन पर गिर गया, पता ही न चला। रीना की कोमल त्वचा पर राज़ के होंठ और हाथ एक अजीब सा जादू कर रहे थे। अब सिर्फ़ उसके जिस्म पर एक गुलाबी ब्लाउज़ और पेटीकोट था। राज़ की उंगलियाँ उसके ब्लाउज़ के हुक ढूँढ रही थीं और रीना की उंगलियाँ राज़ की शर्ट पर खेल रही थीं, उसे नोचती हुई।
एक पल में ब्लाउज़ ज़मीन पर था और रीना के सुडौल स्तन, ब्रा के भीतर से झाँकते हुए, राज़ को पागल कर रहे थे। राज़ ने बिना देर किए ब्रा भी उतार दी, और रीना के भरे-भरे उभार उसके सामने नग्न खड़े थे, मदहोश कर देने वाली भूख जगाते हुए। राज़ ने अपने होंठ उन पर टिका दिए, चूसते हुए, सहलाते हुए। रीना की आहें पूरे कमरे में गूँज उठीं, उसकी आँखें नशे में धुत थीं। वो पलंग पर गिर पड़ी, राज़ को अपनी ओर खींचते हुए।
राज़ ने पेटीकोट भी एक झटके में उतार दिया, और रीना की कामुकता भरी देह अब पूरी तरह से राज़ के सामने थी – चिकनी, गोरी और वासना से तड़पती हुई। उसकी युवा देह की हर बनावट राज़ को अपनी ओर खींच रही थी, उसकी देह से उठती महक राज़ को बेख़ुद कर रही थी। इस जवान लड़की की आग में राज़ पूरी तरह जलने को तैयार था।
राज़ ने अपने कपड़े भी उतारे और रीना के ऊपर झुक गया। रीना ने अपनी टाँगें फैला दीं, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, एक मौन आमंत्रण। राज़ ने उसके भीगे अधरों पर अपना स्पर्श दिया और रीना एक गहरी आह के साथ तड़प उठी। धीमे से, फिर तेज़ गति से, राज़ ने उसे अपने भीतर महसूस किया। हर धक्का उनके जिस्मों को एक कर रहा था, हर आहट प्यार की धुन बन रही थी, जो उनके बेडरूम की खामोशी तोड़ रही थी। रीना की चीख़ें और राज़ की गरमाहट पूरे कमरे को अपनी गिरफ़्त में ले रही थीं। वो दोनों एक-दूसरे में इस क़दर डूब गए कि समय और दुनिया का होश ही न रहा। उनके जिस्मों से निकले पसीने की बूंदें उनके प्यार की गवाह बन रही थीं, जो अब चरम पर पहुँच चुका था।
जब वे शांत हुए, तो दोनों हाँफ रहे थे। रीना राज़ की छाती पर लेटी थी, उसकी उंगलियाँ राज़ की पीठ पर हल्के से चल रही थीं। उनके होंठों पर एक संतोष भरी मुस्कान थी, जैसे एक पुरानी प्यास बुझ गई हो, पर नई भूख जाग उठी हो। यह रात सिर्फ़ एक शुरुआत थी, एक जवान लड़की और एक अधेड़ पुरुष के बीच पनपती इस अतृप्त वासना की, जिसके कई अध्याय अभी लिखे जाने बाकी थे।
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